गुरुवार, 6 अगस्त 2015

जोधपुर वाले पढाई में ध्यान क्यों  नहीं देते?

टीचर ने जोधपुर के छात्रों से पुछा।
टीचर: एक बात बताओ, तुम जोधपुर वाले पढाई में ध्यान क्यों  नहीं देते?
एक जोधपुर छात्र: क्योंकि पढाई सिर्फ दो वजहों से की जाती है।
1st डर से
2nd शौख़ से
और,
फालतू के शौख हम जोधपुर वाले रखते नहीं और
डरते तो किसी के बाप से नहीं।

मंगलवार, 4 अगस्त 2015

जॉनी जॉनी यस पापा इन मारवाडी फ़्रॉम रोमोबा ..

जॉनी जॉनी यस पापा इन मारवाडी फ़्रॉम रोमोबा .....

पपिया पापिया
हा बापा
खोड खादी
ना बापा
कुर बोले
ना बापा
बाकू फार
हाहाहाहाहा ..

शनिवार, 1 अगस्त 2015

डाटा

गांव की लड़की से कंप्यूटर क्लास में पूछा
डाटा (data) क्या होता है? लड़की
बोली so simple "पानी आलि टूंटी के जो ढुजा लगाव है उसे
को डाटा कहते है"

मधुमाखी रो सेत, रीछङा आज भखे ।

मधुमाखी रो सेत, रीछङा आज भखे ।
बाङ खेत ने खाय, जिको कुण रोक सके ।
रेवङ रा रुखाळ, भेङिया आज बणे ।
ओडी गाडर खाल,  अहिंसा सबद भणे ।
साथी रंगीया स्याळ, कपट रा हेत किया ।
अवसर रे उनमान, खोळिया बदळ दिया ।
ले लिनो बैराग, जके ईमान रखे.... ।
बाङ खेत ने खाय, जिको कुण रोक सके ।।

अफसरिया हैं आज, ढोल ज्यूं अजगरिया ।
कागा मोती खाय, हंस रे काकरिया ।
खून परायो चूस, जिकै मुख रातो हैं ।
ज्यूं खटमल बुग, जवा चिचङा साथी हैं
फळीयो तरवर अमर बेल, ज्यूं छायं ढके ।
बाङ खेत ने खाय, जिको कुण रोक सके ।।

हाथी आंकस हीण, बाग रो नास करे ।
ऊंट नकेल तुङाय, ताकङा तेज भरे ।
सूर उजाङे साख, रोजङा फाल चरे ।
नाहर सूतो नींद, स्याळिया मौज करे ।
बिना तेज रो राज, कियां अब राम रखें... ।
बाङ खेत ने खाय, जिको कुण रोक सके ।।

दफ्तर राज कचेङी, चढता दीन करे ।
पंडो ने परसाद, चढे जद काम चले ।
तोल ताकङी, आज मिळे इंसाफ कठै ।
झट पलङो झूक जाय, नोट रो बाट जठै ।
काळा कोट दलाल, हाथ में न्याव बिकै... ।
बाङ खेत ने खाय, जिको कुण रोक सके ।।

नकटी व्हेगी नीत, न्याव खूद आंधो हैं ।
हर मांचे हर ठौङ फरज क्यूं मांदो हैं ।
नौकर रिश्वत खोर, नेताजी बहरा हैं ।
चिमचां रे घर चैन, आज दिन आंरा हैं ।
ईमानदार रे घरां, नहीं पकवान पकै... ।
बाङ खेत ने खाय, जिको कुण रोक सके ।।

राष्ट्र पुरख री पीर, समझ कुण पावे हैं ।
समग्र कान्ती रो सूत्र, हाथ नहीं आवे हैं ।
नीम हकीम बैठ, नब्ज टंटोळ रिया ।
सर्वोदय रा वैद, नहीं अब बोल रिया ।
गांधी सुरग उदास, काळजो हाय धुके ।
बाङ खेत ने खाय, जिको कुण रोक सके.... ।
  नारायण सिंह चारण,  नौख

म्हारी भासा राजस्थानी

म्हारी भासा  राजस्थानी
मीठी मुधरी
चोखी सखरी
हरदम हिये में
भाव भजन में
गीत प्रीत में
रसम रीत में

राजस्थानी
राजस्थानी

पैसा जोड़ रहा हूँ ....

पत्नी ( मायके से)- जानू क्या कर रहे हो ?
पति - बस पैसा जोड़ रहा हूँ .....
पत्नी - वाऊ । मैं जानती थी सोना सस्ता हो गया है
और आपको मेरे नेकलेस की चिंता सता रही होगी
और मेरे न्यू एंड्रॉइड फ़ोन के लिए आप पैसा जोड़ रहे हो ना
डिअर , पर खाना आप अच्छे से खाना । आप कितने अच्छे हो ?
पति - गैलसपी , 20 रूपया रो नोट फाट गीयो है उने जोड़ रीहो
हूँ , टेपां लगा ने ??

शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

अब्दुल कलाम रा मरसिया ....

अब्दुल कलाम रा मरसिया ....

अब्दुल तोड़ी आज दीवारां इण देह री
पूरी कर परवाज. पद परमहंस पावियो

अब्दुल पूगौ आप  अमरापुर रे आँगणे
शोक घणौ संताप नयण नीर मावै नहीं

अब्दुल पूरी आस कथनी करणी एक कर
खुदाबन्द वो खास भगत बड़ौ भगवान रो

अब्दुल तूं आधार भांण भळकतौ भारती
अगनी रौ अवतार साधक सांचो सूरमो

अब्दुल नहीं अनाम. इतिहासां रहसी अमर
कीरत वाळा काम कायम करगौ कोड सूं

अब्दुल वाळी आंण अवरां ने आंणी नहीं
जीवत जुगां प्रमाण भूलै किण विध भारती

रतनसिहं चाँपावत कृत

पोसावे कोन्नी


टीचर : (बच्चो से ) सभी लड़कियो को अपनी बहन समझो .

तभी पपुड़ो  :सर जी मै तो कोनि समझू .

टीचर : क्यो ?

पपुड़ो:सर अगर सभी को अपनी बहन समझूगा तो सर इतनी बहनो का मायरा कैसे भरूगा ???

पोसावे कोन्नी ।

मंगलवार, 28 जुलाई 2015

लिखता तो रोवै कलम, कठै गयो कलाम।

लिखता तो रोवै कलम, कठै गयो कलाम।
आखर संग कागद करै, आँसू भरया सलाम।।

नेह समेत करू नमन मानो मिसाइल मैन
शब्दा री श्रद्धांजलि टपकन लाग्या                      सीधो सरल सुभाव रो एहडो नर नह और
करूँ विदा कलाम जी छलकी नैना कौर
धरम जात सूं उपरे मानव मोटो एक
आज छोड़ चाल्यो अबे नर घणो ओ                    भारत माता भाल ने कियो ऊंचो कलाम
फेरु पाछो आवज्ये सादर करूँ सलाम

सोमवार, 27 जुलाई 2015

याद घणी आवे बिती री बाता

( हम मारवाड़ी हेँ )
"याद घणी आवे बिती री बाताँ,
गाँव रा गौना चरावता,
दडीयाँ रमता,
स्कूलोँ मेँ दाल बाटी खावता गेहूँ  लावता,
छोरियाँ ने बकरियाँ केर चीड़ावता,
टेक्टर री टोली लारे लमुटता,  खेल्डी रा खौखा खावता,
धोरिया  माथे गुड़ता,
मौरीया री पॉखा चुगता,
ढेंलडी़या लारे दौड़ता,
खैल्डे माथे हिंडो घालता,
धुड़ा रो घर बणाय रमता,
रौज माऊ कनू एक रूपियो लेर सकुल जावता,1
बोल्टी रा बौरिया खावता ,
फाटोड़ी चडीया पेरन सकूल जावता,
सकुल मे बाणीया रा छोरा ने कूटता,
छाने छाने बिड़ीया रा टुकड़ा पिवता,
गणाय कुपाव चुगूने जावता,
लुगाईयां रे डगळ री ठोकता,
फागण मे चंग बजांवता,
दीवाली ने टीकड़ीयां फोड़ता,"

(यह हमारे बचपन की मारवाड़ी यादें हैं हम ईनको कभी भूल नही सकते हैं)

शनिवार, 25 जुलाई 2015

फिड़कला घणा आवै

शाम के बाद नेट चलाना हुआ मुश्किल ....
.
.
क्योंकि घरवाले बोले " बंद कर थारा ठीकरा ने....... .फिड़कला
घणा आवै " ।।

शुक्रवार, 24 जुलाई 2015

लिपटण दी चाह

  एक पंजाबी महिला एक हरियाणवी की किराना दुकान पर चाय पत्ती खरीदने गई .
महिला - लिपटण दी चाह है?
हरियाणवी दुकानदार - मन्ने तो ना है....तन्ने है तो लिपट जा .

ले धौलिया

गुस्सा तो तब आता हे...

जब बारात की गाड़ी में सब से पहले सीट रोक कर बैठे...
और जब गाड़ी चलने लगे तब घर वाले बोले

ले धौलिया
फुफों जी ने बैठण दे,
तू खड़यो होज्या...lll