दो डोकरा बाहर रिस्तेदारी मे गया तो पहला आदमी जिस भी जगह
बैठता दूसरा आदमी उसकी जगह साफ कर देता। ऐसा पांच दस
बार हुआ तब जाके एक और डोकरे ने पूछा कि तू खुद की जगह
की बजाय इसकी जगा क्यो साफ कर रिया है
तो उस आदमी ने बोला कि
कय करू भाइ
यो डोकरो धोती म्हारी पेर के आयो है
शनिवार, 13 जून 2015
दो डोकरा
बुधवार, 10 जून 2015
चालो नानेरा चाला
दूसरे राज्यो के लोग छुटियाँ में कुल्लू,मनाली,मसूरी,नैनीताल,शिमला,ओर ना जाने कहाँ कहाँ घूमने जाते ह्---
और अपने तो बस last और first हथियार--
"चालो नानेरा चालां
चढ़ नहीं रही आजकल
Maggi के पीछे पड़े हैं सारे
कोई दारू के samples भी check kare......
साली चढ़ नहीं रही आजकल
आरी जारी
अर्ज किया है कि.......................................
तेरी अदाओ पे में वारी वारी
तेरी अदाओ पे मै वारी वारी
क्या तुम्हारे उधर बारिश आरी?
हमारे इधर तो आरी जारी आरी जारी ।
मंगलवार, 9 जून 2015
मर क्यू री
मेडम: सूर्य के पास कौन सा ग्रह है? हरयाणवी छात्र: एक मिनिट बता रिया हूँ
मेडम: जल्दी बताओ!!!
हरयाणवी छात्र: बता रिया हूँ, मर क्यू री है!
मेडम: शाबाश बैठ जाओ!!!.
शनिवार, 6 जून 2015
यदि मेट्रो जोधपुर मे शुरू होती है
यदि मेट्रो जोधपुर मे शुरू होती हे
तो चेतावनी सुचना इस प्रकार होगी ...
1) धकलो टेशन सोजतीया गेट आवेला,
आडो जीवना हाथ कनी खुलेला, हावल
ऊतरजो सा,
हेठे आगिया तो थाणो कादो निकल जावेला ।
2. टेशन माथे पीली पट्टी रे
लारे ऊबा रईजो,
गेलाइया मत करजो सा ।
3. मेट्रो रो पहलो डब्बो लुगाइयो रो है,
आदमीया लोग डोपा हुवेजु घुस जो मती,
एडो करियो तो पछे होटा पडेला ।
4) मेट्रो मे लुगाया ओर बुढा माईता ने
पहली बैठवा दीजो सा ।
5) मेट्रो मे आवो तो स्मार्ट कार्ड काम मे लिजो,
चार पईसा थाणा ही बचेला ।
6) ओर हेन्गाऊ जरूरी बात..मिराज ओर
गुटखो खाने अटी वटी मत
पिचकारीया मारजो.
थाणा काकोसा केमरा मे हेंग देखे है ।
शुक्रवार, 5 जून 2015
जोधपूर हिला देंगे
मैगी तक तो ठीक है पर किसी ने गलती से कचोरी या मिर्ची बड़े पर रोक लगाई तो पूरा जोधपूर हिला देंगे ।।
आओ जोधपुर की सैर करे
आओ जोधपुर की सैर करें
जोधपुर अजब है !
जोधपुर ग़ज़ब है !!
अच्छा चलिए : आप कैसे पता करेंगें कि आप जोधपुर के किस कोने में हैं ???
1) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी आता है,
उन्हें देखता है
और
चला जाता है... सरदारपुरा है.
2) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी आता है, उन्हें समझाने की कोशिश करता है, फलस्वरुप दोनों लड़ना छोड़ कर समझाने वाले को मारने लग जाते हैं...
ये बी जे ऐस एरीया है.
3) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी अपने घर से आवाज़ देता है :
"मेरे घर के आगे मत लड़ो, कहीं और जाओ"....शास्त्री नगर है.
4) दो आदमी लड़ रहे हैं, पूरी भीड़ देखने के लिये इकट्ठी हो जाये
और
एक आदमी चाय की दुकान लगा दे....
तो ये धान मण्डी है.
5) दो आदमी लड़ रहे हैं, दोनों मोबाइल से कॉल कर
दोस्तों को बुलाते हैं,
थोड़ी देर में 50 आदमी लडने लगते हैं...
ये बम्बा, बकरा मंङी है.
6) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी ढेर सारी बीयर ले आता है,
तीनों एक साथ बीयर पीते हुए एक-दूसरे को गाली देते हैं...!
ये सूरसागर है.
7) दो आदमी लड़ रहे हैं,
दो आदमी और आते हैं,
वो आपस में बहस करने लगते हैं कि कौन सही है कौन गलत, देखते देखते भीड़ जमा हो जाती है,
पूरी भीड़ बहस करती है, लड़ने वाले दोनों खिसक लेते हैं....!
ये तापी बावङी है.
8) दो आदमी लड़ रहे हैं,
एक आदमी आता है,
गन निकालता है
और
ढिचकांव...
और सब शान्त हो जाता है..! यानि कि
आप कबीर नगर कोलोनी पहुँच गए...!
ओर अगर..
दो आदमी लड़ रहे हैं, उन दोनो कि लडाइ मे तिसरा मार कर चला जाए तो फिर यह समझ लीजिए आप उम्मेद चौक पहोच गये है
उम्मेद चौक में आपका स्वागत है !!!
गुरुवार, 4 जून 2015
लाईट आग्यी लाईट आग्यी
मास्टर जी:- बच्चों दुनिया मे सबसे ज्यादा बार खुशीयाँ कहाँ मनाई जाती है।
भैरजीलाल:- गुरूदेव सबसे ज्यादा बार खुशीयाँ राजस्थान में मनाई जाती है।
मास्टर जी:- बताओ कैसे भला ।
भैरजीलाल:- जी यहाँ हर 2-3 घँटे बाद लोग खुशी से झूम के बोलते है की "लाईट आग्यी लाईट आग्यी"
मंगलवार, 2 जून 2015
जाणो कठै है ???
मार्टिन_लूथर_किंग ने कहा था...
अगर तुम # उड़ नहीं सकते तो,
# दौड़ो !
अगर तुम # दौड़ नहीं सकते तो,
# चलो !
अगर तुम # चल नहीं सकते तो,
# रेंगो !
पर # आगे बढ़ते रहो !
.
मारवाड़ी:-
या तो ठीक है लूथरा जी, पण जाणो कठै
है ???
सोमवार, 1 जून 2015
राजस्थानी शब्द
राजस्थानी शब्द
वीरा भाई
भावज भाभी
भंवर बड़ा लड़का
भवरी बड़ी लड़की
छोरा-छोरी लड़का-लड़की
डांगरा पशु
ढोर भेड़बकरी
बींद पती/दुल्हा
बींदणी बहू/दुल्हन
लालजी देवर
लाडो बेटी
लाडलो प्रिये
गीगलो/टाबर बच्चा
लाडी सोतन
गेलड़ दूसरे विवाह में स्त्री के साथ जाने वाला बच्चा
बावनो लम्बाई में छोटा पुरुष
बावनी लम्बाई में छोटी महिला
घनेड़ो-घनेड़ी भानजा-भनजी
भूड़ोजी फूफाजी
धणी-लुगाई पती-पत्नी
भरतार पती
कलेवो नाश्ता
गिवार अनपढ
बेगा बेगा जल्दी जल्दी
बेसवार मसाला
जिनावर जीव जंतु
सिरख रजाई
गूदड़ा छोटा बेड/गद्दा
पथरना छोटा बेड
हरजस भजन
पतड़ो पंचांग
मीती तीथी
बाखल लान
तीपड़ तीसरा माला
शाल सामने का बड़ा कमरा
तखडीओ तराजू
पसेरी/धडी 5 kg
मण 40 kg
सेर 1kg
धुण 20 kg
बेड़ियो मसाला रखने का बॉक्स
घडूची पानी का मटका रखने की वास्तु
ओरा कोने का कमरा
परिंडा पानी रखने की जगह
खेळ पशुओ के पानी पिने का स्थान
कोटड़ी बोक्स रुम
मालिया छत पर कमरा
गुम्हारिया तलघर
कब्जो ब्लाउज
मूण मिट्टी का बड़ा घड़ा
मटकी मिट्टी का घड़ा
ठाटो कागज गला कर अनाज
रखने का बर्तन
गूणीया चाय/दूध/पानी रखने का
छोटा बर्तन तड़काउ भोर
उन्द्दालो गर्मी का मौसम
सियालो सर्दी का मौसम
चौमासो बारिश का मौसम
पालर पाणी पीने का बारिश का
पानी
बाकल पाणी पीने का नल का पानी
दिसा जाना पायखाना जाना
रमणन खेलने
तिस (लगना) प्यास (लगना)
गिट्ना खाना
ठिकाणा पता (Address)
किना उडाणा पतंग उड़ाना
ख्वासजी नाई
अगूण पूर्व
आथूंण पश्चिम
कांजर बनजारा
झरोखो खिड़की/विंडोज
बाजोट लकड़ी की बड़ी चौकी
मांढणो लिखना
कुलियों मिट्टी का छोटा बर्तन
मायरो भात
मुदो तिलक (विवाह में वर का)
मेल विवाहिक प्रीतिभोज
मुकलाओ गोणा/ बालविवाह उपरांत पहली बार पीहर से पत्नी को घर लाना
बटेऊ मेहमान
पावना जवाई
सुतली रस्सी
ठूंगा लिफ़ाफ़ा
पूँगा/मुशल बेवकूफ़
लूण नमक
कंदों प्याज
खूंटी वस्तु/वस्त्र लटकाने का स्थान
कासंन बर्तन
जापो बच्चा पैदा होना
ओबरो अनाज रखने का स्थान
खाट/माचो बड़ी चारपाई
खटुलो छोटू चारपाई
घुचरियो कुत्ते का बच्चा
मुहमांखी मधु मक्खी
भिलड घोडा मक्खी
लूकटी लोमड़ी
गदडो सियार
खुसड़ा जूते चप्पल
बरिंडा बरामदा
आंगी स्त्री की चोली
कांचली स्त्री की कुर्ती
झालरों गले में पहने की माला
गंजी/बंडी बनियान
झबलो/झूबलो पवजात बच्चे का वस्त्र
मांडि कलब (वस्त्रो में दी जाने वाली)
आंक अक्षर
तागड़ी स्त्रिओ के कमर पर पहने का आभूषण
झुतरा बाल
मोड़ों साधू
पूरियों जानवरों के भोजन का स्थान
चूंण आटा
राखूंडो बर्तन साफ करने का स्थान
सांकली सरकंडा
होद पानी रखने की भुमि गत टंकी
उस्तरा रेजर/दाढ़ी करने का औजार
नीरो पशुओ का चारा
चोबारा ऊपर का कमरा
टोळडो ऊँट का बच्चा
उन्दरो चूहा
किलकीटारि गिलहरी
पिडो बैठने की रस्सी/ऊन की चौकी
बातां रुळगी भाषा लारै -ओम पुरोहित कागद
बातां रुळगी भाषा लारै
ओम पुरोहित कागद
राजस्थानी संस्कृति रा ठरका निराळा। संस्कृति पण कांण राख्यां। कांण रैवै राख्यां। हाल घड़ी बडेरां कांण राख राखी है। पण कीं अरथां में मोळी पड़ती लखावै। सरूआत आंगणै सूं। आंगणै सूं सबद खूट रैया है। काको, मामो, मासो, फूंफो, कुलफी आळै भेळो अंकल। मामी, मासी, भूआ, काकी, नरसां भेळी अंटी बणगी। देखतां-देखतां ई आपणी संस्कृति खुर रेई है। ढाबै कुण? मोट्यार तो अंग्रेजी रा कुरला करै। सो कीं भूल'र माइकल जै सन रा नातेदार बणन ढूक्या है।
बात नातां-रिस्तां री। नातेदार बै जका आपरी पांचवीं पीढी सूं पैली फंटग्या। पण भाईपो कायम। रिस्तेदार बो जकै सूं आपरो खून रो रिस्तो। यानी चौथी पीढी सूं लेय'र आप तांई। गिनायत कैवै खुद रै गोत नै टाळ आप री जात रै दूजै लोगां नै। जिण सूं आपरा ब्याव-संबंध ढूक सकै। कड़ूंम्बो कैवै दादै रै परिवार नै। लाणो-बाणो हुवै खुद रो परिवार। गनो होवै संबंध। जियां म्हारी छोरी रो गनो व्यासां रै ढूक्यो है। तो ओ होयो गनो। छोरै अर छोरी रै सासरै आळा होया सग्गा। ऐ बातां अब कुण जाणै?
आजकाळै कीं रिस्ता-नाता तो इलाजू कळा जीमगी। कूख मौत होवण सूं काका-काकी, बाबो-बडिया, भाई-भौजाई, मासो-मासी, फूंफो-भूआ, नणद-नणदोई, जेठ-जेठाणी, देवर-देराणी, काकी सासू, बडिया सासू, भूआ सासू, मासी सासू, मामी सासू जै़डा सबद आंगण में लाधणा दौ'रा होग्या। जद ऐ नामी रिस्तेदार, नातेदार अर गिनायतिया ई नीं लाधसी तो टाबरियां री ओळ कठै।
भेळप अर ऐ कठ राजस्थान्या री आण। पण अब तो ब्याव रै तुरता-फुरती न्यारा होवण री भावना। कुण जाणै कै देवर रो छोरो देरुतो, छोरी देरुती, जेठ रो बेटो जेठूतो, बेटी जेठूती, नणद रा बेटा-बेटी नाणदो अर नाणदी, काकै अर भूआ रा बेटा-बेटी, भतीजा-भतीजी, आजकाळै एक छोरै रो चलण। छोरी तो होवण ई नीं देवै। एक छोरै रै एक छोरो। बाकी रिस्तां रै लागै मोरो। आ होयगी भावना। घणकरै दिनां में टाबर पूछसी- 'पापा ये भूआ और फूंफा या होता है? मासा-मासी किसे कहते हैं?' ना साळा-साळी रैसी, ना मासा-मासी अर ना मामा-मामी। काका-काकी, भूआ-फूंफा अर बाबा-बडिया सोध्यां ई नीं लाधैला
दूसरो ब्याव करणियो दूजबर, किणी रै बिना ब्याव बैठणो, चू़डी पैरणो बजै। इण नै नातो कैवै। नातै जावण आळी लुगाई नै नातायत। नातै गयोड़ी लुगाई रै लारै आयोडै टाबर नै गेलड़ कैवै। जद रिस्ता-नाता, गन्ना, अर कड़ूम्बै रो ग्यान नीं तो संस्कारां रो ध्यान कठै। बडै रै पगाणै बैठणो, सिराणै नीं। भेळा जीमतां टाबर पछै जीमणो सरू करै पण चळू पैली करै। बडेरो आदमी जीमणो पैली सरू करै पण चळू छेकड़ में करै। सवारी माथै लुगाई लारलै आसण बैठै। आगलै पासै बैन, भौजाई, मा, दादी, काकी, बडिया, भूआ आद बैठै। अब पण ऐ बातां तो भाषा रै लारै ई रुळगी। मायड़ भाषा नै मानता मिलै तो पाछी बावड़ै। अब बांचो रिस्ता जाणण री दोय आड्यां-
(१)
पीपळी रै चोर बंध्यो, देख पणियारी रोई।
काईं थारै सग्गो लागै, काईं लागै थारै सोई।।
नीं म्हारै सग्गो लागै, नीं लागै म्हारै सोई।
ईं रै बाप रो बैन्दोई, म्हारै लागतो नणदोई।। (बेटो)
(२)
जांतोड़ा रै जांतोड़ा, थारै कड़ियां लाल लपेटी।
आ आगलै आसण बैठी, थारै बैन है का बेटी।।
नीं म्हारै आ बैन है, नीं है आ म्हारी बेटी।
ईं री सासू अर म्हारी सासू, है आपस में मा-बेटी।। (बेटै री बू)
थार थळी से कागद जी की पोस्ट
Yo-ki-hoyo
A Rajasthani girl marries a Japanese.
A year later they are blessed with twins.
They name them,
Jo-hoyo, So-hoyo.
Another year later they have an unplanned baby. They name him,
Yo-ki-hoyo!