बुधवार, 19 अगस्त 2015

म्हार हिवडा का हार

धापुडी द्वारा अपने मोट्यार को लिखा गया कागद: --

म्हार हिवडा का हार,

म्हारा सोलहा सिंगार,

म्हारी पप्पूडी का पापा…

थारी चौडी-चौडी राफा.!

हे प्राणनाथ जी,

गोपिया का नाथ जी,

म्हार रूप का दास जी,

त्रिलोकी का नाथ जी…

थाको कोजो घणों साथ जी…..!

हे म्हारी जलती ज्योत,

करवा चौथ,

धान का बोरा,

उन्डोडा औरा…

थाका एक दर्जन छोरी और छोरा..!

भोमिया का स्वामी,

म्हारी जामी सा थाकी,

सत्यानाशी,

कुल विनाशी,

कालिया की मासी,

चरणा की दासी,

थार प्राणा की प्यासी,

थाकी पाताल फोड लाडली,

धापुडी का पगा लागणा मानज्यों…

और हो सक तो आखा-तीज पर घरा पधारज्यों…।।

आगे समाचार एक बाचज्यों कि–

सुसरो जी ने हिडकीयों कुत्तों खायगों…

और चौथियों चौथी मैं चौथी बार फेल आयगों.!

सुसरो जी तो हिडक्यो होर मरग्या…

पण मरता मरता सासू जी न हिडक्या करग्या…..!

सासू जी मरा मौत, कु-मौत, कुत्त की मौत और

सासू जी न मरता देख म्हारो भी मरणा सू मन फाटग्यों है…

जीतियों नाई काल स्वर्ग सिधारगों और

बीको तियो पंडत गरूड्यों करायग्यों है.।

गीतूडी के करमडा में है ना
जुआ पडगी है…

और सीतूडी क काना की एक बाली गमगी है…..!

थाकी काणती काकी काल

छाछ खातर घरा आर लडगी…

और म्हारी बडकी सेठानी

घीनाणी सु पानी ल्याती पडगी…..!

भुवाजी रोजीना ही गुन्द का लाडू खावै…

और नानूडा की लुगाई में

मंगलवार की मंगलवार पीतर जी आवै…।।

पपीयों,गीगो,लाल्यों और

राजिया की लुगाई चलती री,

पण थे तो जाणो ही हो

राम के आगे किको बस चाल है…

और होणी न कुण टाल है…..!

हे म्हारा बारहा टाबरा का बाप…

थानै लागै शीतला माता को श्राप..!

थे आदमी हो या हरजाई…

थे मनै अठै ऐकली छोडगा थान शरम कोनी आई.!

थे आ पूरी पलटन म्हारै वास्तै छोडगा…

एक इंजन मैं बारह डब्बा जोडगा..।

इ बार सर्दी अणहोती पडे है,

ई वास्तै टाबर घणा रोव है…

दो चार दिना सु भूखा ही सोव है…!

थाकि माय न

अब भी थोडी घणी शरम बाकी होव तो

पाछा कदै ही मत आइज्यों…

पर पाँच हजार रूपिया हाथु हाथ भिजाज्यो..

दिस इस स्नेक

एक बार एक विदेशी राजस्थान  आया..
तभी सड़क पर एक लम्बा काला साँप पड़ा दिखाई दिया...
विदेशी चिल्लाया- दिस इस स्नेक, दिस इस स्नेक...
पीछे से किसान आया और विदेशी के सर पर जोर से मार कर कहा.... डफोल
दिस इस नोट स्नेक...
दिस इस गोगा महाराज
चल हाथ जोड

मारवाड़ी गर्लफ्रैंड से गप्पें

लड़का व्हॉटसअॅप पे अपनी मारवाड़ी गर्लफ्रैंड से गप्पें लडा रहा था ।

लड़का- प्रिये सो रही हो, तो स्वप्न भेजो,
जाग रही हो, तो यादें भेजों,
हँस रही हो, तो खुशी भेजों,
रो रही हो, तो आसुँ भेजो ।

लड़की का रिप्लाय आया....

ठीकरा मांज री हूँ .... भगोलो... भेजूँ कई???

छाणा

अगर चीन की बार्डर अपने राजस्थान से लगती, तो अपने राजस्थान , की लुगाईया "छाणा" थेपती -थेपती  आधा चीन पे कब्जो कर लेती.....

कलक्टर बण ग्यो।

लड़की: मैं तुम्हारे प्यार में लुट गई,
बर्बाद हो गई, बदनाम हो गई।

लड़का: तो डाकण मैं थारा प्यार म kisso कलक्टर बण ग्यो।

राजस्थान की लड़की


राजस्थान की लड़की को अंग्रेजी सीखने का जुनून चढ़ गया। एक बार जब वह ऑटो में बैठी तो बोली- ओ माई गाॅड, अतरी माटी!

ऑटो से उतर कर वह बाजार में जूती लेने लगी तो दुकानदार से बोली- ब्रदर जूती आगे से तो ओके है पण पीछै सूं बटको भरै है।

फिर गोलगप्पे खाने लगी तो गोलगप्पे वाले को बोली- ब्रदर तेरे गोलगप्पे तो नाइस हैं, पण वाटर में थोड़ा लूण कमती है।

मंगलवार, 18 अगस्त 2015

बोलो धत तेरे की…!

नमस्कार को टाटा खाया,नूडल को आटा!! अंग्रेजी के चक्कर मेंहुआ बडा ही घाटा !!!! बोलो धत्त तेरे की !! माताजी को मम्मी खा गयीपिता को खाया डैड!! दादाजी को ग्रैंडपा खा गये,सोचो कितना बैड !!!! बोलो धत्त तेरे की !!गुरुकुल को स्कूल खा गया,गुरु को खाया चेला!! सरस्वती की प्रतिमा परउल्लू मारे ढेला !!!!बोलो धत्त तेरे की !!चौपालों को बियर बार खा गया,रिश्तों को खाया टी.वी.!! देख सीरियल लगा लिपिस्टिकबक-बक करती बीबी !!!! बोलो धत्त तेरे की !!रस्गुल्ले को केक खा गयाऔर दूध पी गया अंडा!! दातून को टूथपेस्ट खा गया,छाछ पी गया ठंढा !!!! बोलो धत्त तेरे की !!परंपरा को कल्चर खा गया,हिंदी को अंग्रेजी!! दूध-दही के बदलेचाय पी कर बने हम लेजी !!!!बोलो धत्त तेरे की||

चाल समोसो खुवा दे..

राजस्थानी छोरी अपने बॉयफ्रेंड से...

छोरी: आज तो मने मेक्ड़ोनल्स लेजा....

छोरो: ले जाऊं पण पेली बिकी
स्पेलिंग बोल के बता..

छोरी: ( दो मिनट सोचणे के बाद) वा रेणदे इयान कर "के.एफ.सी " में ले चाल...

छोरो: ले जाऊं पण पेली बिको फुलफोम  बता..

छोरी: रेण दे र मंगता 
चाल समोसो खुवा दे..

रविवार, 16 अगस्त 2015

कैर

भासा अपनी प्रेमिका सु- तू कई बात करे गेली तू केवे तो आसमान सु तारा तोड़ ने लियाऊ
प्रेमिका:- तारा तोड़न रे पेली एक काम कर मारी माँ  अचार वास्ते 2 किलो कैर लिया है वे चुट दे।

शुक्रवार, 14 अगस्त 2015

कानिया मानिया कुर्रर्ररररररर

मारवाड़ीयो की आवाज की बुलंदी इतनी हँ
की
अगर वो एक बार कान मे

कानिया
मानिया
कुर्रर्ररररररर

बोल दे तो हवाई जहाज़ की आवाज को भी फैल कर दे

गुरुवार, 13 अगस्त 2015

महेंद्र सा नगर ने श्रद्धांजलि

महेंद्र सा नगर ने श्रद्धांजलि

नगर नगीनों नाथ क्यूँ तू म्हांसूं कोसियो
हे हरी थारे हाथ राखे चाही मेट दे

महेंद्र गढ़ मेहरान मान बढायो मोकळो
हुया सुण हैरान बेगो आंथ्यो भान अज

मालानी रो मालको मारवाड़ री आण
महेंद्र मोटो मानवी छोड़ चल्यो कमठाण

साहित जग सूनो हुयो हुई घण अज हाण
महेंद्र बिन सुनो हुयो देखो गढ़ मेहराण

संस्कृति रो सूरमो छायो देश विदेश
अनबेल्या ही चल दियो ठावी लागी ठेश

अवनी पे अंधियार ज्यूँ हो जावे भान बिन
देखु नजर पसार नगर बिन मेहराण हुयो

कुण राखे अब ध्यान मायड़ रो हे महेन्द्रा
जग में हुई पिछाण थारे बल मायड़ तणी

एक नर राजा मान दूजो नर महेन्द्रा
भगती री पहचान जग में कराई जोर की
राजावत श्रवण सी

जिवंता है

दो लूगाई आपस मै बात कर रही थी 

एक जनी बोली डावङी मारा पती दैवता है।

दूसरी बोली डावङी थारा भाग जोरका है
म्हारा पती तो हाल ही जिवंता है

ई बातां मिनख भूलै कोनी...

बातां राजस्थान री।

ई बातां मिनख भूलै कोनी...
आ समझ ल्यो कै , बै बातां ऊँट गै डाम हाळी सी हुवै।
,
मेरो नयो नयो ब्याव हुयो हो ।
दिसंबर के महीना में ! कोई दस दिन बाद मळ लाग ग्या ! दो जनवरी नै मेरी सासु मनै तार भेज्यो ...

अब मैं तो पढ़यो लिख्यो आदमी
तारबांच्यो !! बो तार मेरी सासु भेज्यो हो !"कै कंवर साब मळ् शरू हुग्या थे शनिवार नै आ ज्यायो तेल बाळ स्यां ....गुलगुला बड़ा खा लेया

"मै दूसरे ही दिन एक देसाई बीड़ी गो मंडळ ,एक मर्फी हालो रेडियो लेगे सासरै पुग ग्यो !

बठै मनै तातो पाणी झलायो । मनै थोड़ो रौब झाड़नो हो ,
मैं बोल्यो -"तातो पाणी तो लुगाई पताई पीवै अर का फेर कमजोर मोट्यार .... मैं तो कोरै मटकै को पाणी पीऊँ
"सगळा वाह वाह करी कै जंवाई तो जबर मोट्यार है ।मनै कोरो किंकर सो पाणी झला दियो और में एक सांस में लौटो खाली कर दियो ।

मेरै गळै स्यूं लेगे किडनी फ़ेफ़डा ताईं सपीड उपड़यो ..
.जाणै कणी लट्ठ घसो दियो है....पण में सहन कर ग्यो।

आथण मेरी सासु गुलगुला बड़ा बणाया ...मैं खूब गुल गुला बड़ा खाया और ठंडो पाणी ओज्यु पियो!
फेर थोड़ी देर तक बीड़ी पी और आल इंडिया रेडियो पर ठुमरी दादरी सुणी ।रात नै दस बजे मेरी सासु रजाई और सोड़ीयो झलायो।

मैं पाछो रौब झाड़ दियो -"ना माँजी रीजाई पाछी ले ज्यावो ... मनै तो इस्यो पाळो सुवावै।"मेरी सासु रीजाई पाछी लेके उठगी ।

में भगवान् नै हाथ जोड़के और एक आनंदकर गोळती लेकर सो ग्यो ।

रात नै बारा बजे मेरा हाड कांपण लाग ग्या ....में घणी कोशीश करी, पण दांत कांट किलारी हाळै ज्यूँ कूट कूट कूट कूट करण लॉग ग्या ।

मेरो सब्र जवाब दे ग्यो ... कै आज मोट्यार कल्डो हुगै मरसी ...इयां तो गंडक ही को मरै ।में उठ्यो और रीजाई ल्याण खातर दूसरै कमरै में बड़ग्यो !

गळती स्यूं रसोई में घुस ग्यो ..इनै बीनै हाथ मारया जणा एक लौटे क ठोकर लागगी ।लौटियो गुड ग्यो और मेरी सासु जाग गी ।

मैं शर्मीज ग्यो और पाछो जा क मांचलियै पर पड़ग्यो .. मेरी सासु सोच्यो कै कंवर साब नै प्यास लागी है। बा एक सेर ळो ताँबे को लोटो भरयो और मेरै कनै आ क बोली --ल्यो

अंधेरो हो ... मैं सोच्यो कै सासु माँ रीजाई ल्याई है । मैं बोल्यो ,- ऊपर गेर दयो ।

सासु माँ ठंडो पाणी मेरै ऊपर गेर दियो और जा क सो गी ।
अब भाईडो में कई देर तो फाटेङो किन्नौ (पतंग) करै ज्यूँ थर्रर्रर ...थर्रर्र करयो ....फेर कलडो हुग्यो ..

.तीरकबाण हाळै ज्यूँ ।दिनगै समूचा मेरै कनै भेळा हुग्या । मेरो शरीर तो लट्ठ भर को कलडो हु राख्यो ।

कोई की उपाय बतावै कोई कीउपाय बतावै ।

फेर मेरी साळी बोली कै ...आपणो पाडियो कलडो हुयो जणा आपाँ बिंगे डाम दियो ...

जीजोजी गै भी डाम दयो , नई तो बाई नै धोळो ओढ़णो पड़सी ।

मेरी साळी रसोई में गई और चिंपियो तातो कर क ल्याई

मनै उल्टो करगे और मगरां में रीढ़ हाळी हाडी पर तातो चिंपियो चेप दियो ।

मेरी सर्दी तो जांती रहई पण बो डाम गो मंडाण आज भी है ।
खम्मा घणी सा®