बुधवार, 14 जनवरी 2026

लोहडी: पंजाब का प्रमुख त्योहार

क्या आप जानते हैं ? लोहडी पंजाब का प्रमुख त्योहार है ?


लोहड़ी का पर्व एक राजपूत योद्धा दुल्ला भट्टी कि याद में पुरे पंजाब और हिमाचल , हरियाणा सहित उत्तर भारत में मनाया जाता है ,
लोहड़ी की शुरुआत के बारे में मान्यता है कि यह राजपूत शासक दुल्ला भट्टी द्वारा गरीब कन्याओं सुन्दरी और मुंदरी की शादी करवाने के कारण शुरू हुआ है. दरअसल दुल्ला भट्टी पंजाबी आन का प्रतीक है. पंजाब, राजस्थान गुजरात की तरह विदेशी आक्रमणों का सामना करने वाला प्रान्त था । ऐसे में विदेशी आक्रमणकारियों से यहाँ के लोगों का टकराव चलता था .
दुल्ला भट्टी का परिवार विदेशी आक्रांताओं का विरोधी था.वे आक्रांताओं को लगान नहीं देते थे. इन आक्रांताओं ने दुल्ला के दादा सांदल भट्टी और पिता का वध करवा दिया..
दुल्ला भट्टी इसका बदला लेने के लिए इन से संघर्ष करता रहा. विदेशी आक्रांताओं की नजर में वह डाकू था लेकिन वह गरीबों का हितेषी था. आक्रांता आम जनता पर अत्याचार करते थे और दुल्ला आम जनता को अत्याचार से बचाता था.
दुल्ला भट्टी पंजाब में रहता था। उस समय पंजाब में स्थान स्थान पर स्थानीय लड़कियों को यौन गुलामी के लिए बल पूर्वक अरब देशों के अमीर लोगों को बेचा जाता था।
दुल्ला भट्टी ने एक योजना के तहत लड़कियों को न सिर्फ मुक्त करवाया बल्कि उनकी शादी भी उनके समाज के लडको से करवाई और उनकी शादी कि सभी व्यवस्था भी करवाई।
सुंदर दास नामक गरीब किसान भी आक्रांताओं के अत्याचार से त्रस्त था. उसकी दो पुत्रियाँ थी सुन्दरी और मुंदरी. गाँव का नम्बरदार इन लडकियों पर आँख रखे हुए था और सुंदर दास को मजबूर कर रहा था कि वह इनकी शादी उसके साथ कर दे.
सुंदर दास ने अपनी समस्या दुल्ला भट्टी को बताई. दुल्ला भट्टी ने इन लडकियों को अपनी पुत्री मानते हुए नम्बरदार को गाँव में जाकर ललकारा. उसके खेत जला दिए और लडकियों की शादी वहीं कर दी।जहाँ सुंदर दास चाहता था. इसी के प्रतीक रुप में रात को आग जलाकर लोहड़ी मनाई जाती है.!!
दुल्ले ने खुद ही उन दोनों का कन्यादान किया। कहते हैं दुल्ले ने शगुन के रूप में उनको शक्कर दी थी।  वैसे तो हिन्दु धर्म में शादी मे 7 फेरे होते है पर उस वख्त जब सुन्दर मुन्दरी की चौथा फेरा हो रहा था तो इन आक्रांताओं ने दूल्ले को गोली मरवा दी थी और लोगो ने इसी 4 फेरे वाली शादी को ही सम्पूर्ण मान लिया था, तभी से राजस्थान गुजरात की तरह पँजाबी हिन्दु भी शादी मे 4 फेरे लेते है और बाकी भारत मे 7 फेरे ली जाती है । राजस्थान में लोक देवता पाबूजी राठौड़ व गुजरात में लोकदेवता वच्छराज सोलंकी ( वाछरा दादा) की कथा भी इसी तरह की है आज भी इनके वंशज भी शादी के समय चार ही फेरे लेते हैं दुल्ला भट्टी की इस कथा की हमायत करता लोहड़ी का यह गीत है, जिसे लोहड़ी के दिन गाया जाता है :

सुंदर मुंदरिए - हो तेरा कौन विचारा-हो 
दुल्ला भट्टी वाला-हो 
दुल्ले ने धी ब्याही-हो 
सेर शक्कर पाई-हो 
कुडी दे बोझे पाई-हो 
कुड़ी दा लाल पटाका-हो 
कुड़ी दा शालू पाटा-हो 
शालू कौन समेटे-हो 
चाचा गाली देसे-हो 
चाचे चूरी कुट्टी-हो
जिमींदारां लुट्टी-हो 
जिमींदारा सदाए-हो 
गिन-गिन पोले लाए-हो 
इक पोला घिस गया जिमींदार वोट्टी लै के नस्स गया - हो! 

दुल्ला भट्टी विदेशी आक्रांताओं कि धार्मिक नीतियों का घोर विरोधी था। वह सच्चे अर्थों में धर्मनिरपेक्ष था.उसके पूर्वज संदल बार रावलपिंडी के शासक थे जो अब पकिस्तान में स्थित हैं। यह वही शहर है जिसको बप्पा रावल ने बसाया था इस शहर पर अनेक राजवंशों का शासन रहा, जिसमें गुहिल, भाटी, सोलंकी, सोढा प्रमुख है, दुल्ला भट्टी सभी पंजाबियों का नायक था। आज भी पंजाब(पाकिस्तान) सिंध, राजस्थान गुजरात सहित पाकिस्तान से लगते हुए बॉर्डर इलाक़े में दुल्ला भट्टी को नायक मानने वाली बड़ी आबादी वहां अभी भी निवास करती हैं ये पर्व भारत ही नहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी मनाया जाता हैं ।
लोहडी : पंजाब का प्रमुख त्योहार

बुधवार, 20 अगस्त 2025

राजपुताना की रियासतों में प्रचलित कहावतें


राजपुताना की रियासतों में प्रचलित कहावतें :

समै  एकसो ना रवै  ,पल पल बदळै रोज |
कदे मिलै ना  पावली ,कदे भरी रवै गोज ||

अदळाबदळी होयसी, है कुदरत  रो रूल |
दो पिसां रै माख मैं,मिनखपणो मत भूल ||

आडो आ  मजबूर गै, है जे आवण जोग |
राजा  रंग बणाय  द्यै, वखत  लगावै रोग ||

समै सदांरो बादस्या, हुक्म सुणै ना कोय |
बाळ ना बाकों हो सकै,समै सनिपी होय ||

समै  हरावै  मिनख नै, समै  दिरावै जीत |
समै जकै रो साथ दे,आखी दुनिया मीत ||

समै जकै स्यूं रूसज्या,राजा रंक फकीर |
नाच  नचावै  बेगिण्यां,  चौडै  पड़ै सरीर ||

समै  लुटादे आबरू, समै नी छोडै लाज |
भोगी  समजै सैन  मैं,बूरी  समै री गाज ||

गाज समै री है बूरी ,रूसै  कुळ परिवार |
हाल नी  पुछै आपरा , चाहे  मरो बिमार ||

बैरी  दुस्मण  ना  पड़ै ,बूरी  समै  री मार |
दाव  ना  चुकै समै कदे ,दूधारी  तलवार ||

समै सुव्हाणो सोवणो ,जिणरो देवै साथ |
दिन दोगुणो  मोज मैं, होवै चोगणी रात ||

राजपुताना की रियासतों में प्रचलित कहावतें 

शुक्रवार, 11 जुलाई 2025

गुरू महिमा दोहा

              श्री गुरू महिमा
                      दोहा
करूं निवण गुरुदेव कू, पल पल लागूं पांय ।
महिमा सातूं मुल्क री , सतगुरु दी समझाय ।।
सतगुरु की करू सेवना , मुझ साचोड़े मन्न ।
बगसे शिष को बापजी , धिन धीणो अन्न धन्न ।।
                       छन्द त्रिभंगी
नमहूँ गुरुदाता शीश निवाता , गुण जस गाता हरसाता ।
धिन धिन जग धाता ध्यान धराता , पाप नसाता सुख पाता
देवन के दाता विमल विधाता , सबद सुनाता सत सारी ।
धिन धिन गुरु धाऊँ शीश नमाऊं , वारी जाऊँ बलिहारी जी
वारी वारी बलिहारी ।।१।।

गूढ़ा रस ज्ञानी संगम सानी , दया दिलानी दरसानी ।
सतसगं सरसानी सत समझानी , बदरा धानी बरसानी ।।
माया इम मानी महज मसानी , धारे ध्यानी तपधारी ।
धिन धिन गुरु धाऊँ शीश नमाऊं , वारी जाऊँ बलिहारी ।।२।।

तोड़े धी ताळा जमरा जाळा , करे उजाळा किरणाला ।
गहरे गुण वाळा दीन दयाळा , जन प्रतपाळा जोराळा ।।
भूचर भोपाळा खे विचराळा , रहे रिझाळा मन मारी ।
धिन धिन गुरु धाऊँ शीश नमाऊं , वारी जाऊँ बलिहारी ।।३।।

धर चित गुरु धारा पास पुकारा , आज हमारा आधारा ।
बूडत भव तारा भय हर भारा , दीन सहारा दातारा ।।
सुख दुख इकसारा सोच सुधारा , सतं सहारा सखुकारी ।
धिन धिन गुरु धाऊँ शीश नमाऊं , वारी जाऊँ बलिहारी ।।४।।

आतुर मन आवे जी अकुलावे, शरण सिधावे सरसावे।
परतख पद पावे व्याध जरावे बुध बगसावे बल पावे।।
गुण "सूरो" गावे मोद मनावे, सुख उपजावे पतियारी ।
धिन धिन गुरु धाऊँ शीश नमाऊं , वारी जाऊँ बलिहारी ।।५।।
छप्पय
बडा ज तिणरा भाग , सतगुरु जिण पर सरसे।
अघ हंदी जम आग , बण बादर गुरु बरसे।।
गम आगम रा गेह , झलक हद अणहद जाणे।
अहर निश खेह अखेह , परम गुरु अलख पिछाणे।।
अवगुण हर सद्गुण चित आपे, हर माया तम जाळ हरे।
कव जोड़ पाण " सूरो" कहे, सतगुरु शरण लियों सरे।।
सुरेश दान 

शुक्रवार, 31 जनवरी 2025

रामदेव सतक

रामदेव सतक
बरसी अणहद बादळी,खेती बाड़ी खेल।
करसा  जावै खेत में सुगन,पलाऊ पैल।।१।।

हाळी   करै  हळोतरौ,  सुगन तणो विस्वास।
करसां मुड़तै देखिया ,अजमल चित आभास।।२।।

करसां खेती कारणै,  सुगन  विचार्या  आम।
अजमल देख्यौ आवता, पाछा मुड़िया धाम।।३।।

अजमल कारण पूछियौ,पाछा किणविध आप।
सुगन  पलाऊ  बांझियै, पड़ै  काळ  अणमाप।।४

अजमल असल अराधना, दरस द्वारकाधीस।
सुत  थारौ  बण  सांतरौ, आवूं द् यौ  आसीस।।५।।

अजमल घर खुद आविया,मदन मुरारी रूप।
झटपट  झूला   झूलिया, दीप्या  दिवलै  धूंप।।६।।

भल भादरवा बीज रा, दरसण दीना आप।
अजमल मैंणा आपरी,आंख्यां कीधा धाप।।७।।

बाळक अणहद बोलकौ,रंग रूप पलटाय।
अवनी अंबर ओपतौ, मधुर मंद  मुसकाय।।८।।

पळका करता पौढिया,बाळक पींगै माय।
मैंणादे   हरसावतै, अंक   उठायौ  आय।।९।।

कपड़ा कतरण घोड़लै,चढ़िया बाळक आप।
भैरव  राकस  मारियौ, सगळा   हर संताप।।१०।।
लगोलग.......

रविवार, 17 अप्रैल 2022

राजस्थानी बीमारियां

राजस्थानी बीमारियां 


कोई भी बाहर का डाक्टर राजस्थान में आकर अस्पताल  नहीं खोल सकता 


क्यों? 

क्योंकि राजस्थान के मरीज की बिमारी राजस्थान के डाक्टर के अलावा कोई समझ ही नहीं सकता 

कुछ राजस्थानी बीमारियां :-
"पिंडी फ़ाटै है"
"कालजे मे धुओं उठै है
"जी दुःख पाव है"
"सार दिन माथौ भन भन करै है"
"पेट म कुलल कुलल होव है"
"कालजे म कुलमुलाट सी होव है"
"दांत कुलै है"
"जी सो उठ है"
"दो जना बोलेडा भी कोई न सुहाव है"
"गोडा चु चु करें  है"
"कान में सईं सईं होरी है "
"कालजे में धकल बकल लाग री है"
"जी राजी कोनी"

ऐसी ऐसी बीमारी सुनकर अच्छे अच्छे MBBS को अपनी डिग्री पर शक हो जाता है कि साला कहीं ये Chapter छूट तो नहीं गया था।।।

गुरुवार, 30 सितंबर 2021

सुखी जीवण रा टोटका ....

सुखी जीवण रा टोटका


झोड़ नहीं झिकाळ नहीं,फालतू पंपाळ नहीं! 
झगड़ो नहीं टंटो नहीं,झूठो छातीकुटो नहीं! 
नशो नहीं पतो नहीं,अंटसंट खाणों नहीं! 
कोट कचेड़ी थाणों नहीं,गलत रास्ते जाणों नहीं! 

मिले जका में संतोषी,भेळो करणं री भूख नहीं! 
सुबह शाम सुमरण करे,इणमें होवे चूक नहीं! 
गााय कुत्ता नें रोटी देवे,पंछीयां ने चुग्गो देवे
घर आया री करे खातरी,हाजरी में ऊभो रेवे! 

थारी नहीं म्हारी नहीं,बहम री बीमारी नहीं! 
लाग नहीं लपेट नहीं,लेणों नहीं देणों नहीं! 
घर की बात घर में राखे,पाड़ोसी नें केणों नहीं! 
फैशन नहीं शौक नहीं,भटकणं री आदत नहीं! 

माथे नहीं चोटी नहीं,मांगणं री आदत नहीं! 
खुदरो काम खुद करे,दूजा नें सताणों नहीं! 
खुदकी नींद उड ज्यावे तो,दूजां नें जगाणों नहीं! 
काम नहीं क्रोध नहीं,कोई सुं विरोध नहीं! 

चिंता नहीं सोच नहीं,कोई की भी होड नहीं! 
झूठ नहीं कपट नहीं,थोड़ो भी अभिमान नहीं! 
झूठी थोथी शान नहीं,अकड़ अर गुमान नहीं! 
सादगी रो जीवणों,लोग दिखाऊ ठाठ नहीं! 

आपस में विश्वास राखे,मन में राखे गांठ नहीं! 
सुख शांति घर में रेवे,रोज मचे घमसाणं नहीं! 
राम री गिरस्थी सुखी,जठै खींचाताणं नहीं!

बुधवार, 25 मई 2016

प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली

प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली

पानी में गुड डालिए,
बीत जाए जब रात!
सुबह छानकर पीजिए,
अच्छे हों हालात!!

धनिया की पत्ती मसल,
बूंद नैन में डार!
दुखती अँखियां ठीक हों,
पल लागे दो-चार!!

ऊर्जा मिलती है बहुत,
पिएं गुनगुना नीर!
कब्ज खतम हो पेट की,
मिट जाए हर पीर!!

प्रातः काल पानी पिएं,
घूंट-घूंट कर आप!
बस दो-तीन गिलास है,
हर औषधि का बाप!!

ठंडा पानी पियो मत,
करता क्रूर प्रहार!
करे हाजमे का सदा,
ये तो बंटाढार!!
भोजन करें धरती पर,
अल्थी पल्थी मार!
चबा-चबा कर खाइए,
वैद्य न झांकें द्वार!!

प्रातः काल फल रस लो,
दुपहर लस्सी-छांस!
सदा रात में दूध पी,
सभी रोग का नाश!!

दही उडद की दाल सँग,
पपीता दूध के संग!
जो खाएं इक साथ में,
जीवन हो बदरंग!!

प्रातः- दोपहर लीजिये,
जब नियमित आहार!                                                  
तीस मिनट की नींद लो,
रोग न आवें द्वार!!

भोजन करके रात में,
घूमें कदम हजार!
डाक्टर, ओझा, वैद्य का ,
लुट जाए व्यापार !!

देश,भेष,मौसम यथा,
हो जैसा परिवेश!
वैसा भोजन कीजिये,
कहते सखा सुरेश!!

इन बातों को मान कर,
जो करता उत्कर्ष!
जीवन में पग-पग मिले,
उस प्राणी को हर्ष!!

घूट-घूट पानी पियो,
रह तनाव से दूर!
एसिडिटी, या मोटापा,
होवें चकनाचूर!!

अर्थराइज या हार्निया,
अपेंडिक्स का त्रास!
पानी पीजै बैठकर, 
कभी न आवें पास!!

रक्तचाप बढने लगे,
तब मत सोचो भाय!
सौगंध राम की खाइ के,
तुरत छोड दो चाय!!
सुबह खाइये कुवंर-सा,
दुपहर यथा नरेश!
भोजन लीजै रात में,
जैसे रंक सुरेश!!

देर रात तक जागना,
रोगों का जंजाल!
अपच,आंख के रोग सँग,
तन भी रहे निढाल!!

टूथपेस्ट-ब्रश छोडकर,
हर दिन दोनो जून!
दांत करें मजबूत यदि,
करिएगा दातून!!

हल्दी तुरत लगाइए,
अगर काट ले श्वान!
खतम करे ये जहर को,
कह गए कवि सुजान!!

मिश्री, गुड, खांड,
ये हैं गुण की खान!
पर सफेद शक्कर सखा,
समझो जहर समान!!

चुंबक का उपयोग कर,
ये है दवा सटीक!
हड्डी टूटी हो अगर,
अल्प समय में ठीक!!

दर्द, घाव, फोडा, चुभन,
सूजन, चोट पिराइ!
बीस मिनट चुंबक धरौ,
पिरवा जाइ हेराइ!!

हँसना, रोना, छींकना,
भूख, प्यास या प्यार!
क्रोध, जम्हाई रोकना,
समझो बंटाढार!!

सत्तर रोगों कोे करे,
चूना हमसे दूर!
दूर करे ये बाझपन,
सुस्ती अपच हुजूर!!

यदि सरसों के तेल में,
पग नाखून डुबाय!
खुजली, लाली, जलन सब,
नैनों से गुमि जाय!!

भोजन करके जोहिए,
केवल घंटा डेढ!
पानी इसके बाद पी,
ये औषधि का पेड!!

जो भोजन के साथ ही,
पीता रहता नीर!
रोग एक सौ तीन हों,
फुट जाए तकदीर!!

पानी करके गुनगुना,
मेथी देव भिगाय!
सुबह चबाकर नीर पी,
रक्तचाप सुधराय!!

अलसी, तिल, नारियल,
घी सरसों का तेल!
यही खाइए नहीं तो,
हार्ट समझिए फेल!!

पहला स्थान सेंधा नमक,
पहाड़ी नमक सु जान!
श्वेत नमक है सागरी,
ये है जहर समान!!

तेल वनस्पति खाइके,
चर्बी लियो बढाइ!
घेरा कोलेस्टरॉल तो,
आज रहे चिल्लाइ!!

अल्यूमिन के पात्र का,
करता है जो उपयोग!
आमंत्रित करता सदा ,
वह अडतालीस रोग!!

फल या मीठा खाइके,
तुरत न पीजै नीर!
ये सब छोटी आंत में,
बनते विषधर तीर!!

चोकर खाने से सदा,
बढती तन की शक्ति!
गेहूँ मोटा पीसिए,
दिल में बढे विरक्ति!!

नींबू पानी का सदा,
करता जो उपयोग!
पास नहीं आते कभी,
यकृति-आंत के रोग!!

दूषित पानी जो पिए,
बिगडे उसका पेट!
ऐसे जल को समझिए,
सौ रोगों का गेट!!

रोज मुलहठी चूसिए,
कफ बाहर आ जाय!
बने सुरीला कंठ भी,
सबको लगत सुहाय!!

भोजन करके खाइए,
सौंफ,  गुड, अजवान!
पत्थर भी पच जायगा,
जानै सकल जहान!!

लौकी का रस पीजिए,
चोकर युक्त पिसान!
तुलसी, गुड, सेंधा नमक,
हृदय रोग निदान!!

हृदय रोग, खांसी और
आंव करें बदनाम!
दो अनार खाएं सदा,
बनते बिगडे काम!!

चैत्र माह में नीम की,
पत्ती हर दिन खावे !
ज्वर, डेंगू या मलेरिया,
बारह मील भगावे !!

सौ वर्षों तक वह जिए,
लेत नाक से सांस!
अल्पकाल जीवें, करें,
मुंह से श्वासोच्छ्वास!!

सितम, गर्म जल से कभी,
करिये मत स्नान!
घट जाता है आत्मबल,
नैनन को नुकसान!!

हृदय रोग से आपको,
बचना है श्रीमान!
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक,
का मत करिए पान!!

अगर नहावें गरम जल,
तन-मन हो कमजोर!
नयन ज्योति कमजोर हो,
शक्ति घटे चहुंओर!!

तुलसी का पत्ता करें,
यदि हरदम उपयोग!
मिट जाते हर उम्र में,
तन के सारे रोग!!
        _____......_____


मंगलवार, 10 मई 2016

कोयल कूक सुहावणी : MARWADI KAVITA

कोयल कूक सुहावणी


कोयल कूक सुहावणी, 
मधुरा  बोले  बेण !
किणविध तू काली भई,
किण विध राता नैण
बागां बागां मैं फिरी,
मिल्यो न कोई सैण !
कूक कूक काली भई,
रो रो राता नैण
: बिल्ली

उरला बिल रा ऊन्दरा,
परला बिल जो जाय !
लाख टका दूं रोकड़ा,
बैठो बैठो ही खाय !!
                          चूहा

भांय थोडी़ भाड़ो घणो ,
झोखो ऊपर जाय !
बीच मिनीमासी झांपले,
लाखटका कुण खाय!!


मंगलवार, 26 अप्रैल 2016

डाक्साप

डाक्साप


जनता के प्यारे "डाक्साप" जी के पास एक पेशेंट भाई   पहुँच गया ....

भाई :  डोकसाप ..आह ..
पेट में बहुत ..
दर्द ...
हो रहा है ...आह ....

डोक्साप : अच्छा, ये बताओ आखरी बार खाना कब खाया था ?

भाई : खाना तो रोज ही ...
डोक्साप : अच्छा अच्छा , (2 ऊँगली उठाते हुए )
आखरी बार गये कब थे ...

भाई: जाता तो रोज ही हु ...पर होता नहीं है ...
डोक्साप समज गये ...

अन्दर बहुत सारी बोतले पड़ी थी उसमे से एक उठा लाये ...

ओर साथ ही केल्क्युलेटर भी लेते आये ...

फिर पूछा - घर कितना दूर है तुम्हारा ?

भाई : 1 km
डोक्साप ने केलकुलेटर पे कुछ हिसाब किया फिर बोतल में से चार चम्मच दवाई निकाल के एक कटोरी में डाली

डोक्साप : वहिकल से आये हो या चल के ?
भाई : चल के ..

डाक्सोप : जाते वक्त भाग के जाना
डोक्साप ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से बहार निकाल ली ...

डोक्साप : घर कौनसे फ्लोर पे है ?
भाई: 3rd फ्लोर पे

डोक्साप ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से ओर  बहार निकाल ली ...

डोक्साप : लिफ्ट है या सीढियाँ चढ़ के जाओगे ?
भाई : सीढियां ...
डोक्साप ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से ओर  बहार निकाल ली ...

डोक्साप : अब आखरी सवाल का जवाब दो
घर के मेन दरवाजे से टॉयलेट कितना दूर है ?
भाई: करीब 20 फुट

डोक्साप ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से ओर  बहार निकाल ली ...

डाक्सोप : अब मेरी फीस दे दो मुझे पहले ..
फिर ये दवाई पीओ ..
ओर फटाफट घर चले जाओ, कहीं रुकना नहीं ..
ओर फिर मुझे फोन करना ....

भाई ने वैसा ही किया ........

आधे घंटे बाद भाई का फोन आया डोक्साप पे ...
एकदम ढीली आवाज में .........

डोक्साप ,,,,,,
दवाई तो बहुत अच्छी थी आपकी .....
पर केलकुलेटर ठीक करवा लेना


हम 10 फुट से हार गये ........

शनिवार, 16 अप्रैल 2016

बुझाणो कोनी : एक राजस्थानी व्यंग्य कविता

बुझाणो कोनी : एक राजस्थानी व्यंग्य कविता

पति-पत्नी कै बीच मैं,
एकर बहस छिड़ी बड़ी सोणी।

पत्नी बोली- इसो कोई विभाग बताओ,
जिण मैं लुगाई कोनी।

राजनीति, धर्म, थानेदारी, गुण्डागर्दी,
म्हे तो सब जगा बढ़गी हां।

ओर तो ओर म्है तो,
चांद पर भी चढगी हां।

पति कै माथा मैं या बात अड़गी,

पण झट भेजो लगायो अर
बोल्यो,

दमकल विभाग मैं,
थे एक भी लुगाइ कोणी

खिसियांती सी पत्नी बोली,
बो तो म्हे जाणकर ही छोड़यो है,
थे आ बात जाणो कोणी,

लुगायां रो काम आग लगाणो है,
बुझाणो कोनी..

बुधवार, 6 अप्रैल 2016

डोफा

डोफा


डोकरी - डोडा 1 अप्रेल से बंद होगा
.
.
डोकरो - डोफा विश्नोई तो रही
.
.
डोकरी- हा
.
डोकरो- तो डोडा खूब मिली तु मजा कर.


www.myrajasthani.blogspot.in

गुरुवार, 31 मार्च 2016

म्हारो मरूधर देश..: राजस्थानी कविता 30 मार्च राजस्थान दिवस के उपलक्ष्स पर

म्हारो मरूधर देश : राजस्थानी कविता 30 मार्च राजस्थान दिवस के उपलक्ष्स पर 


साथीयो  30 मार्च राजस्थान दिवस के उपलक्ष्स पर राजस्थान की आन बान और शान की गाथा को गाती ये कवीता


सीधा साधा मिनख मानवी,रंग रंगीलो देश.!!
घणो हढीलो ओ गर्वीलो म्हारो मरूधर देश..!!

मौढ बाजरा मक्को निपजे,कर बोर तरबुज..!!
मिल बाट के खावा मैं नही करा आपस में दुज...!!

झीणी-झीणी गुलाल जईया,रेत उडे आकाशा...!!
शुरा री जननी मरूधरा,बोले विरा री भाषा...!!

अढै भोली सुरत शुरा री,अढै चौडी छाती विरा री...!!
आ धरती भक्त मीरा री,आ मरूधरा राम सा पीरा री...!!

चेतक झोको अवतारो चालै-बिजली री चाल...!!
राणा प्रताप टुट पडीया बण दुश्मण रो काल...!!

हिम्मत नही दुश्मण री,जो देखे बुरी नजर सु....!!
चिर कालजो हाथ धरा, नामो निशाण मिटावा धरा सु....!!

आ जननी भामाशाहो री आ धरती पन्ना धाय री....!!
देश री रक्षा री खातीर बली चढावे जायो री....!!

मरूधरा री नारीया ममता री फुलवारीया...!!
अगर देश पर संकट आवे, तो ले निकल पडे तलवारीया...!!

आन बान और शान पर ऐ मर मीटी हैं नारीया....!!
पिया रण में खुब लडै,सींहणी करे जौहर री तैयारीया..!!!

नस-नस में फोलाद भरयो हैं,अंग-अंग मैं शक्ती...!!
जननी थारे काम आवा, थु दे अपार शक्ती....!!

आपस मैं खुब रेवा हेत सु,बोला प्रेम री भाषा....!!
बार-बार अढै जन्म लु,हैं म्हारे  मन री आशा...!!

सीधा-साधा मिनख मानवी,रंग-रंगीलो वेश...!!
घणो हढीलो ओ गर्वीलो, म्हारो मरूधर देश.....!!!!

CIA, RAW

CIA, RAW 


ब्रेकिंग न्यूज़:

कृपया करके आपके जितने भी रिश्तेदार जोधपुर में रहते हैं,
उनको सूचित कर दें कि...

CIA, RAW और दूसरे सूत्रों से पता चला है,
कि...
तमाम
बस स्टॉप, बस स्टैंड, माणेक चोक,
सिवांची गेट, प्रतापनगर, हाउसिंग बोर्ड , सरसवतीनगर, पावटा,रेलवे स्टेशन,  रातानाडा, जालौरीगेट, महामंदिर, मंडोर, बनाड, कमलानगर, पालगांव, सूरसागर, घनटाघर, नवचोकिया, एयरफोर्स, झालामणड, भगत की कोठी, शास्ञीनगर, बासनी, बोरोनाडा, मेडतीगेट, नागौरीगेट, जूनीमंडी, सोजतीगेट, स्टेडियम,  कबीरनगर, और तमाम शहर के छोटे और बड़े चौराहो के
करीब........
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मतीरे आ गए हैं!!!!!

गुरुवार, 17 मार्च 2016

मारवाड री ऐ सीखण जेडी बातों।                                                               

मारवाड री ऐ सीखण जेडी बातों।   
                                                                
1.   चौखी संगत में रेणो ।


2.   काम ऊं काम करणो।    

                                       
3.   ऊड़तो तीर नी लेवणो । 

 
4.   घणो लालच नी करणो।    

                            
5.   सोच समझ पग राखणो। 

 
6.   रास्ते आवणो,  रास्ते     

7.   जितो हो सके उतो कम बोलणो ।

8.   छोटा मोटा रा कायदों राखणो ।                                                                                                                                                                                                                                                                                        9.   जितो पचे उतो ई खावणो।(पेट खुदरों  होवे)                                                                                                                                                                                                                      

10.  बीना पूछीया सलाह नी देवणी ।   

11.  पराई पंचायती नी करणी।

12.  आटे मे लूण खटे,  लूण मे आटो नी।                                                                                                                                                                                                                                                                                  13.  पगा बलतो देखणो  डुंगर बलतो नी।                                                               

14.  बीच में ही लाडे री भुवा नी बणनो ।

15.  सुणरी सबरी करणी मन री।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                       

शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

खूटा यहीं गडेगा

खूटा यहीं गडेगा 


एक जाट ने सार्वजनिक स्थान पर भेस बाधने के लिये खूटा गाड़ रखा था। अन्य चौधरियो ने खूटा उखाड़ने का अनुरोध किया किन्तु जाट ने बात नहीं मानी। अन्त में पन्चायत बुलायी गयी।

पन्चो ने जाट से कहा -तूने खूटा गलत जगह  गाड़ रखा है।
जाट- मानता हूँ भाई।

पन्च- खूटा यहाँ  नहीं गाड़ना चाहिए था।
जाट- माना भाइ। 

पन्च- खुटे से टकरा कर बच्चों को चोट लग सकती है।
जाट- मानता हूं।

पन्च- भेस सार्वजनिक स्थान पर गोबर करती है, गन्दगि फैलती है।
जाट- मानता हूं।

पन्च- भेन्स बच्चों को सिन्ग पुन्छ भी  मार देती है।
जाट- मानता हूं,
मैंने तुम्हारी सभी बातें मानी। अब पन्च लोगों मेरी एक ही बात मान लो।

पन्च- बताओ अपनी बात!!!
जाट- खूटा यहीं गडेगा ।।

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

लिफाफा

लिफाफा


आज एक रिस्तेदार की  शादी में जाना था,,
200 का लिफाफा बनाया,,

फिर सोचा छोड़ो,,, यार 51 और
मिला कर एक स्मार्टफोन ही दे देते है,,,

वो भी क्या याद करेगा.......

(251 रु में smartphone कि कुछ वर्ष पहले स्कीम थी )

शनिवार, 20 फ़रवरी 2016

नाम किको लगाणो है

नाम किको लगाणो है 


अगर जिवन में कभी कोई गलती हो जाये तो घबराने की जरूरत नही

बस शांत मन से अकेले में  बेठ के विचार करे कि

नाम किको लगाणो है

भाटो

भाटो


राजेश : पापा मे जीवन मे आगे बढने के लिये क्या करू ?

पापा : भाटो ले और सबु पेली इ मोबाईल ने  फोड।

गुरुवार, 18 फ़रवरी 2016

गाय है गाय...माहरी छोरी

गाय है गाय...माहरी छोरी


छुरे चलने लगते है

 
खुन खोलने लगता है

 
दिमाग घुमने  लगता है.

जब शादी के इत्ते साल बाद भी ससुराल वाले कहते  है.


" गाय है गाय...माहरी छोरी"


www. myrajasthani.blogspot.in

रविवार, 14 फ़रवरी 2016

भोगना मै

भोगना मै 

दू एक भोगना मै

बीवी को सुबह सुबह उठाने के अलग अलग अंदाज ____
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हिन्दू - जानू उठो सवेरा हो गया
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मुस्लिम - बेगम उठो चाँद ढल गया .
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क्रिश्चियन - डार्लिंग गेट अप्स इट्स डाउन .
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लेकिन .
मारवाडी तो मारवाडी है - तावडो आयो हे ऊटे क दू एक भोगना मै